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आदतें सुधारने की सही विधि

आदतें सुधारने की सही विधि
संसार में प्रत्येक व्यक्ति स्वयं के संस्कारों, विचार धाराओं और आदतों के अनुरूप अपना जीवन गुजारता है । सूक्ष्मता से देखें तो हमारी अनेक आदतें एक दूसरे से कहीं भी मेल नहीं खाती । यहां तक कि एक परिवार में रहने वाले 4-5 सदस्यों की दिनचर्या में मोटी मोटी समानतायें होते हुए भी सूक्ष्म विषमतायें अवश्य नजर आती हैं ।
प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दिनचर्या का तरीका, भोजन करने का तरीका, उठने बैठने का तरीका, काम करने का तरीका, वस्त्र पहनने का तरीका, वाहन चलाने का तरीका या लोगों से बात करने का तरीका सही लगता है । परिवार के किसी एक भी सदस्य के रहन सहन का तरीका गलत होने या स्वयं के अनुरूप न होने पर बाकी सदस्यों द्वारा अक्सर उसे टोका जाना सामान्य सी बात है । इसके बावजूद वह व्यक्ति अपनी शैली के अनुरूप ही दिनचर्या अपनाना पसन्द करता है ।
कई बार यह टोका टोकी मन में वैमनस्य उत्पन्न करने लगती है जो बढ़ते बढ़ते एक बड़े विवाद का रूप लेकर सम्बन्धों को कांच के टुकड़ों की तरह बिखेर देती है । हमारे द्वारा बार बार और अपमान करने के भाव से टोके जाने पर सामने वाले का विद्रोही आचरण हमारी मानसिक स्थिरता की नींव को कम्पायमान कर देता है । उस व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र में घिरकर हम स्वयं को भी नकारात्मकता से भर लेते हैं ।
उस समय यदि स्वयं की सूक्ष्मता से जांच करें तो पायेंगे कि हम मानसिक पीड़ा, अवसाद और बेचैनी के कारण नकारात्मकता के भंवर में घिर चुके होते हैं । दूसरी और सामने वाला व्यक्ति अपनी उन्हीं रहन सहन की आदतों के साथ सन्तुष्टि के साथ समय बिताता हुआ नजर आता है ।
किसी की गलत आदत को सुधारना एक चुनौती हो सकती है लेकिन हम उसकी कमजोरियों, बुरी आदतों को टोक टोककर सुधारने के प्रयासों में उसकी नकारात्मक ऊर्जा को स्वयं में अवशोषित करके अपनी ही मानसिक शान्ति को भंग कर लेते हैं ।
सामाजिक जीवन में रोज हमारा लोगों के सम्पर्क में आना स्वाभाविक सी बात है, जिनके साथ किसी बात को लेकर उलझना हमारे सम्बन्धों में खटास उत्पन्न कर सकता है । प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई कमजोरी अवश्य होती है या किसी विषय को लेकर हमारी आपसी राय भिन्न भिन्न भी हो सकती है ।
किसी की आदत, कमजोरी या वैचारिक भिन्नता को लेकर यदि हम सामने वाले को बदलने और स्वयं को सही सिद्ध करने की जिद्द में पड़कर विवादों में उलझते हैं तो हम अपनी ही मानसिक ऊर्जा का नुकसान करते हैं ।
स्वयं के लिये या दूसरों के लिये हानिकारक होते हुए भी हर व्यक्ति अपने विचारों, आदतों और संस्कारों के साथ जीवन बिताना आरामदायक महसूस करता है । इसलिये उन्हें बार बार टोककर बदल पाना सम्भव नहीं है ।
एक बार गर्म तवे पर हाथ रखने के बाद व्यक्ति दोबारा उस पर हाथ नहीं रखता क्योंकि वह पूरी तरह से समझ जाता है कि उसका हाथ जल जायेगा । ठीक इसी प्रकार बुरी आदतों से होने वाले नुकसान का ज्ञान होने पर ही उन्हें आत्म प्रेरणा द्वारा अर्थात् यथार्थ समझ विकसित करके ही बदलना सम्भव है ।
इसलिये हमें आत्म संशोधन पर ध्यान केन्द्रित करके ऐसे लोगों के साथ के साथ आपसी सामंजस्य बिठाने के साथ साथ अपनी कार्यशैली, आचरण और व्यक्तित्व को स्वच्छ बनाये रखकर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने पर अधिक ध्यान देना चाहिये ।
उत्कृष्ट जीवन शैली से होने वाले लाभ और गलत आदतों से होने वाले नुकसान का तुलनचित्र जब उसके मन में अंकित होगा, तब स्वतः ही वह अपनी बुरी आदतें बदलने के लिये आत्म प्रेरित होगा । यह एक प्रकार की तपस्या ही कही जा सकती है जो सम्भवतः लम्बे अन्तराल बाद ही फलीभूत होगी, किन्तु उसका प्रभाव ठोस और स्थाई अवश्य रहेगा ।
ऊँ शान्ति
मुकेश कुमार मोदी, बीकानेर, राजस्थान
मोबाइल नम्बर 9460641092

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6 Comments

Mohammed urooj khan

30-Jan-2024 11:57 AM

👌🏾👌🏾👌🏾👌🏾

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Alka jain

28-Jan-2024 04:51 PM

Nice

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Milind salve

28-Jan-2024 04:44 PM

Nice one

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